विदेश यात्रा के नाम पर दो अरब से ज्यादा का खर्च

काठमांडु : प्रधानमंत्री, मंत्री और सरकार के उच्च पदस्थ व्यक्ति द्वारा विदेश यात्राओं पर एक वर्ष में करिब दो अरब रुपये से अधिक खर्च किया गया है ।साथ् मे स्वदेश जिलों के भ्रमण मे भी राज्यकोषका खर्च अधिक होने कि खबर है।

विदेश जाने वालों मे मन्त्री और कर्मचारीयों कि लहर एक साथ् होने से भी राज्य का खर्च अधिक होने कि अनुमान है। नियंत्रक महालेखाकार कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष 2079-80 में आंतरिक और बाह्य यात्रा व्यय पर 2 अरब 70 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे।

यह पिछले वित्त वर्ष से करीब 17 फीसदी ज्यादा है। इसमें प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल की विदेश यात्राओं का खर्च शामिल नहीं है।प्रधानमंत्री दाहाल ने एक साल में 6 से ज्यादा देशों का दौरा किया है। अकेले उनकी चीन और अमेरिका यात्रा पर 47.4 करोड़ रुपए खर्च हुए।

यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल का दैनिक खर्च 34 लाख रुपये था।पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने पर्यटन के लिए सिर्फ 1 अरब 59 करोड़ रुपये आवंटित किये थे, लेकिन सरकार ने इससे 1 अरब 11 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किये।

हालाँकि सरकार ने मितव्ययता की नीति लागू करने की घोषणा की है, लेकिन जनरल अकाउंट के आँकड़ों के अनुसार वह फिजूलखर्ची को कम नहीं कर पाई है।सामान्य लेखा के आँकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2078/79 में पर्यटन पर 2 अरब 30 करोड़ रुपये खर्च किये गये।

इसके अलावा, पिछले वित्तीय वर्ष 2077-78 में पर्यटन पर केवल एक अरब आठ करोड़ रुपये खर्च किये गये थे।ऐसा लगता है कि पिछले वित्तीय वर्ष में मेहमानों के स्वागत और उपहारों समेत विभिन्न कार्यक्रमों पर सरकार ने दो अरब 40 लाख रुपये खर्च किये हैं।

इसी तरह, निगरानी और मूल्यांकन पर एक अरब 17 करोड़ रुपये, विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के लिए 10 अरब 24 करोड़ रुपये और सेवाओं और परामर्श पर एक अरब 82 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

विदेश दौरे पर जाने पर प्रधानमंत्री और मंत्रियों को प्रतिदिन 250 अमेरिकी डॉलर, विशेष स्तर के कर्मचारियों (सचिवों) को 225 अमेरिकी डॉलर और संयुक्त सचिवों को 175 अमेरिकी डॉलर मिलते हैं।होटल खर्च के लिए उन्हें अलग से रकम मिलती है।

यूरोप, अमेरिका, कनाडा, कोरिया, जापान और अन्य देशों का दौरा करने पर उन्हें 33 प्रतिशत अधिक भत्ता मिलता है।सरकार ने विदेश यात्रा भत्ते को पांच श्रेणियों में बांटा है।

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, मुख्य न्यायाधीश, स्पीकर और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष का निर्धारण ‘उच्चतम स्तर’ पर किया गया है।अन्य विशेष पदों पर कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था है।

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